पूरी दुनिया में अलग-अलग धर्मों के लोग पाए जाते हैं, और सभी धर्म में अंतिम संस्कार करने की प्रक्रिया भी अलग होती है। हिंदुओं में जहां शव को जलाया जाता है, वही मुस्लिम धर्म में शव को कब्र में दफना दिया जाता है। ठीक इसी तरह बहुत बौद्ध धर्म में भी अंतिम संस्कार की अलग प्रक्रिया है, ऐसे में आज के इस आर्टिकल में हम बताएंगे कि बौद्ध धर्म में अंतिम संस्कार कैसे किया जाता है? बौद्ध धर्म में antim sanskar के क्या नियम है? आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें-
बौद्ध धर्म में मृत्यु और पुनर्जन्म को लेकर मान्यता-
बौद्ध धर्म में मृत्यु और पुनर्जन्म को लेकर यह मानता है कि मनुष्य की आत्मा पुनर्जन्म चक्र में रहती है, मृत्यु के उपरांत जब आत्मा शरीर त्याग देती है, तो उसका अगला जन्म उसके कर्मों के हिसाब से मिलता है। हालांकि सभी धर्मों में लगभग यही मानता है। Baudh Dharm में जब भी किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, अंतिम संस्कार के दौरान विशेष मंत्रों का जाप होता है। ताकि मृत व्यक्ति की आत्मा को उसके अच्छे कर्मों का अच्छा फल मिले और वह अच्छे लोक में जन्म ले सके।
बौद्ध धर्म के ग्रंथों के अनुसार जब भी किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उसकी आत्मा कुछ समय के लिए भटकती है, और कुछ दिनों बाद अगले जन्म के लिए आगे बढ़ती है। मृत्यु के उपरांत आत्मा अच्छे लोक में जल्दी दूसरा जन्म ले, इसके लिए अंतिम संस्कार के दौरान विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है।
बौद्ध धर्म में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया ( antim sanskar prakriya)
बौद्ध धर्म में अंतिम संस्कार कई चरणों में किया जाता है जो निम्नलिखित किस प्रकार है-
मृत्यु के बाद के अनुष्ठान-
- बौद्ध धर्म जब किसी की मृत्यु हो जाती है, तो परिवार के लोग और भिक्षु यानी सन्यासी मृत्यु व्यक्ति के पास कुछ दूरी पर बैठकर बौद्ध धर्म के श्लोक का उच्चारण करते हैं।
- बौद्ध धर्म में जब भी किसी व्यक्ति के प्राण निकलते हैं, तो सबसे पहले पार्थिव शरीर को स्नान कराया जाता है। और पारंपरिक सफेद कपड़ा लपेट दिया जाता है।
- मृत शरीर को घर के किसी शांति स्थल पर रखा जाता है, ताकि मित्रगढ़ और परिजन उस व्यक्ति को श्रद्धांजलि दें सके।
- बौद्ध धर्म और परंपराओं के अनुसार मृत्यु के उपरांत उस व्यक्ति की आत्मा कुछ दिनों तक शरीर के आसपास इसलिए इस परिवार जनों को इस दौरान अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित किया जाता है, ताकि इसका फल उस व्यक्ति को मिल सके।
Baudh Dharm mein antim sanskar kaise kiya jata hai?
बौद्ध धर्म में अंतिम संस्कार मुख्य रूप से दो तरह से किया जाता है-
- Dah Sanskar
- अंतिम संस्कार की यह सबसे प्रचलित विधि है, भगवान बुद्ध का अंतिम दाह संस्कार भी ठीक इसी तरह किया गया था। इसी अधिकांश बौद्ध धर्म के अनुयायी इसी विधि को अपनाते हैं। मृत शरीर को खुले जगह पर ले जाकर अग्नि में समर्पित कर देते हैं।
- इस दौरान बौद्ध भिक्षु और परिवार के सभी सदस्य प्रार्थनाएं और मंत्र जाप का उच्चारण करते हैं। फिर शरीर के राख को किसी पवित्र नदी में विसर्जित कर देते हैं।
- दफनाने की प्रक्रिया
- बौद्ध समुदाय में कई जगह शव को जलाने की बजाए कब्र में दफनाने परंपरा की परंपरा है, इस परंपरा को तिब्बती बौद्ध विशेष रूप से अपनायें हुए हैं।
- इस प्रक्रिया में मृत शरीर को मूवी में समर्पित कर दिया जाता है, फिर उसके बाद उसके ऊपर एक स्मारक या स्तूप बना दिया जाता है। यह परंपरा जेन बौद्ध, और तिब्बती बौद्ध समुदाय में प्रचलित है
अंतिम प्रार्थना और स्मरण समारोह-
- मृत व्यक्ति के शरीर का अंतिम संस्कार करने के बाद मृतक व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना किया जाता है। बौद्ध धर्म में मृत्यु के 3,7,49 और 100 दिन बाद विशेष अनुष्ठान की परंपरा है ।
- विशेष अनुष्ठान के दिन भिक्षुक और परिवार के सभी सदस्य मिलकर मृत व्यक्ति की आत्मा को अगले जन्म में सहायता मिल सके इसके लिए meditation करतें हैं। फिर उसके बाद उसे व्यक्ति के नाम पर दान पुण्य करते हैं ।
Note- तिब्बती बौद्ध में एक और परंपरा है जिसमें शव को पक्षियों को खाने के लिए छोड़ देता है, इस परंपरा को Sky Burial के नाम से जाना जाता है।
Conclusion-
बौद्ध धर्म के अनुयायी मृत्यु को जीवन का अंत नहीं मानते बल्कि इस नए जीवन का एक महत्वपूर्ण चरण मानते हैं। इसलिए अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया सच्चे मन से करते हैं ताकि मृत व्यक्ति के नई जीवन की यात्रा सुखद हो। बौद्ध धर्म में meditation, dah Sanskar, प्रार्थना, और बौद्ध भिक्षुओं को दान करना, इस धर्म की परंपरा का भिन्न अंग है, जो आत्मा को अगले जन्म के लिए सही दिशा में मार्गदर्शन करता है। हालांकि बौद्ध समुदाय में अंतिम संस्कार करने की अलग-अलग विधियां है, लेकिन सभी का उद्देश्य एक समान है। मृत व्यक्ति के आत्मा को शांति मिले और मोक्ष मिले